A2Z सभी खबर सभी जिले कीTechnologyअन्य खबरे

केवल नाम का ‘आदर्श ग्राम’? कृष्णनगर में ज़मीनी विकास पर सवाल

श्रीभूमि जिला, असम | संवाददाता:

Krishnanagar गांव, जो Dargarbong Gaon Panchayat के अंतर्गत आता है, को सरकारी सूची में ‘आदर्श ग्राम’ के रूप में शामिल किया गया है। लेकिन गांव में विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को लेकर अब गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि घोषित अधिकांश योजनाएं कागजों तक ही सीमित हैं और ज़मीन पर अपेक्षित काम दिखाई नहीं दे रहा। इससे लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023–24 में गांव के विकास के लिए लगभग 40 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि इस राशि का प्रभाव धरातल पर नजर नहीं आ रहा। कई विकास कार्य या तो शुरू ही नहीं हुए हैं या अधूरे पड़े हैं।

ग्रामीणों ने बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर चिंता जताई है। कई घरों में अब तक शौचालय की सुविधा नहीं है। नियमित कचरा संग्रहण की व्यवस्था नहीं है और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र स्थापित नहीं किया गया है। शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित बताई जा रही है — अभिभावकों के अनुसार 155 नंबर निशिकांत एलपी स्कूल वर्तमान में संचालित नहीं हो रहा। गांव में आधुनिक विद्यालय, पुस्तकालय, डिजिटल लैब या सक्रिय डिजिटल सेवा केंद्र का अभाव है।

इसके अलावा, सड़क, जल निकासी, स्वच्छ पेयजल और नियमित बिजली आपूर्ति जैसी मूलभूत सुविधाओं में भी कमी बताई जा रही है। कुटीर उद्योग, लघु उद्यम, आधुनिक कृषि प्रशिक्षण, खेल मैदान और सामुदायिक केंद्र जैसी योजनाओं में भी उल्लेखनीय प्रगति नहीं दिख रही।

ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि यदि 40 लाख रुपये स्वीकृत हुए, तो उनका उपयोग कहां और किस प्रकार किया गया? अब तक ठोस विकास क्यों नहीं दिख रहा?

ग्रामीणों ने धनराशि के उपयोग की पारदर्शी जांच, खर्च का सार्वजनिक विवरण और लंबित विकास कार्यों को शीघ्र शुरू करने की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि ‘आदर्श ग्राम’ से अपेक्षा की जाती है कि वहां समग्र और सतत विकास हो — जिसमें शत-प्रतिशत स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, बेहतर सड़कें, स्वास्थ्य सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल सेवाएं और रोजगार के अवसर सुनिश्चित हों। लेकिन कृष्णनगर में इन मानकों की पूर्ति हो रही है या नहीं, यह अब स्थानीय स्तर पर चर्चा और बहस का विषय बन गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि केवल सरकारी सूची में नाम दर्ज होना पर्याप्त नहीं है; वास्तविक और दिखाई देने वाला विकास ही किसी गांव को सच मायने में ‘आदर्श ग्राम’ बनाता है।

Back to top button
error: Content is protected !!